मै भी साक्षात्कार करने घर पहुच गया साक्षात्कार का सिलसिला शुरू हुआ तो वह अपने बारे में बताने लगी . मै मूर्खो की तरह लिखने लगा | अचानक वह रुक कर मेरे करीव में आयी बोली, आप मेरा हर हफ्ते साक्षात्कार छाप दिया करे ,आप जो चाहे वो मिलेगा | आखो के जरिये सीधी दावत मिल रही थी . मै थोडा सा झिझक कर बोला मै समझा नहीं ?
मेरा हाथ पकड़ कर बोली यार मुझे मालिश करवाना बहुत पसंद है क्या आपको ये सब पसंद है | मैंने अपना हाथ छुड़ा लिया बोला भाई मुझे नवाबी शौक पसंद नहीं है | वह बोली आप मेरी मालिश करो मै आपकी करुगी | हम लोग मिलकर काम करेगे . आप मेरा पी आर का काम ले लो | बाकी तो आप समझदार है | मै उसका हाथ छुड़ाकर चलता बना |
एडिटर
सुशील गंगवार